जैव प्रौद्योगिकी - सिद्धांत और प्रक्रियाएं - भाग 1
जैवप्रौद्योगिकी:
जीव विज्ञान और प्रौद्योगिकी को सम्मिलित करने वाला बहु-अनुशासनात्मक क्षेत्र।
उपयोगी उत्पादों और प्रक्रियाओं के लिए जीवित जीवों का हेरफेर करता है।
कृषि, चिकित्सा, स्वास्थ्य सेवा और पर्यावरण में चुनौतियों का समाधान करता है।
मानव जनसंख्या वृद्धि:
वैश्विक जनसंख्या में वृद्धि संसाधनों, भोजन, स्वास्थ्य सेवा और पर्यावरण को प्रभावित करती है।
जैवप्रौद्योगिकी की आवश्यकता:
चुनौतियों के समाधान: खाद्य उत्पादन, दवाएं, स्वास्थ्य सेवा और पर्यावरण।
जैवप्रौद्योगिकी उत्पाद:
उदाहरण: जीएम फसलें, इंजीनियर बैक्टीरिया से इंसुलिन, जैवप्रौद्योगिकी टीके।
जैवप्रौद्योगिकी कैसे योगदान देती है:
कृषि, चिकित्सा और पर्यावरण संरक्षण में सुधार।
सतत प्रथाओं को बढ़ावा देता है।
सीखने के परिणाम:
जीव विज्ञान, आनुवंशिकी, सूक्ष्म जीव विज्ञान और प्रयोगशाला तकनीकों में ज्ञान।
समस्या-समाधान कौशल और नैतिक जागरूकता का विकास।
जैवप्रौद्योगिकी के सिद्धांत:
आनुवंशिक सूचना का हेरफेर।
सूक्ष्मजीवों का उपयोग।
डीएनए प्रौद्योगिकी एक मौलिक सिद्धांत है।
आनुवंशिक अभियांत्रिकी:
वांछित लक्षणों को पेश करने के लिए डीएनए में परिवर्तन।
कृषि, चिकित्सा और उद्योग में अनुप्रयोग।
डाउनस्ट्रीम प्रोसेसिंग:
जैवप्रौद्योगिकी उत्पादों की शुद्धि और पुनर्प्राप्ति।
फिल्ट्रेशन, सेंट्रीफ्यूगेशन, क्रोमैटोग्राफी और सुखाने को सम्मिलित करता है।