आनुवंशिकी और विकास - वंशानुक्रम का आणविक आधार - 2
RNA अवलोकन
RNA: राइबोन्यूक्लिक अम्ल, प्रोटीन संश्लेषण और जीन विनियमन में संलग्न।
DNA से भिन्न: अधिक लचीला, कम स्थिर, सक्रिय कोशिकीय प्रक्रियाओं में संलग्न।
RNA घटक
शर्करा: राइबोज़, DNA के डिऑक्सीराइबोज़ की तुलना में एक अतिरिक्त हाइड्रॉक्सिल समूह के साथ।
नाइट्रोजीनस बेस: एडेनिन (A), ग्वानिन (G), साइटोसिन (C), यूरेसिल (U)।
न्यूक्लिओसाइड: राइबोज़ शर्करा + नाइट्रोजीनस बेस (फॉस्फेट समूह के बिना)।
RNA संरचना
पॉलिन्यूक्लिओटाइड्स: फॉस्फोडाइएस्टर बंधों से जुड़े न्यूक्लिओटाइड्स की लंबी श्रृंखलाएं।
संरचना: सामान्यतः एकल-स्ट्रैंड, हेयरपिन जैसी जटिल 3D संरचनाएं बना सकता है।
विशेष लक्षण
असामान्य न्यूक्लिओटाइड्स: स्थिरता और कार्य के लिए संशोधित बेस।
राइबोथाइमिडिन: tRNA में संशोधित न्यूक्लिओटाइड, सटीक mRNA पठन के लिए।
RNA के प्रकार
mRNA: मैसेंजर RNA, DNA से राइबोसोम तक आनुवंशिक जानकारी ले जाता है।
tRNA: ट्रांसफर RNA, प्रोटीन संश्लेषण के लिए विशिष्ट अमीनो अम्ल राइबोसोम तक लाता है।
rRNA: राइबोसोमल RNA, राइबोसोम की संरचनात्मक और एंजाइमेटिक घटक।
snRNAs: स्मॉल न्यूक्लियर RNAs, pre-mRNA स्प्लाइसिंग में संलग्न।
miRNAs: माइक्रोRNAs, ट्रांसक्रिप्शन के बाद जीन अभिव्यक्ति को विनियमित करते हैं।
कैटालिटिक RNA: राइबोज़ाइम रासायनिक अभिक्रियाओं को उत्प्रेरित करने में सक्षम।
प्रमुख भेद
थाइमिन बनाम यूरेसिल: स्थिरता के लिए DNA में थाइमिन; RNA में यूरेसिल।
स्थिरता: डिऑक्सीराइबोज़ और थाइमिन के कारण DNA अधिक स्थिर।
विकासवादी सिद्धांत: “RNA संसार” परिकल्पना सुझाती है कि RNA, DNA से पहले विकसित हुआ।