पौधों की वृद्धि एवं विकास

याद रखने योग्य अवधारणाएँ - पौधों की वृद्धि एवं विकास



1. मरिस्टम (Meristems):

  • एपिकैल मरिस्टम (Apical meristems):
  • जड़ों और पौधों की छोटी जड़ों के टुकड़ों में स्थित, प्राथमिक वृद्धि के लिए जिम्मेदार।
  • लैटेरल मरिस्टम (Lateral meristems):
  • डालियों और जड़ों की ओर पाए जाने वाले, द्वितीयक वृद्धि के लिए जिम्मेदार।

2. कोष विभाजन (Cell Division):

  • माइटोसिस (Mitosis):
  • कोष विभाजन जो दो आनुवंशिक रूप से समान दोनों बेटी कोषों को उत्पन्न करता है।
  • माइयोसिस (Meiosis):
  • कोष विभाजन जो चार आनुवंशिक रूप से विविध बेटी कोषों को उत्पन्न करता है, लिंग प्रजनन के लिए महत्वपूर्ण।

3. विभेदन (Differentiation):

  • अनिश्चित कोषों को विशेष कार्य करने के लिए विशेषण देने की प्रक्रिया।
  • विभिन्न ऊतकों के निर्माण का परिणाम।

4. प्राथमिक वृद्धि (Primary Growth):

  • एपिकैल मरिस्टम की गतिविधि के कारण होती है।
  • डालियों और जड़ों की लम्बाई में वृद्धि को शामिल करती है।

5. द्वितीयक वृद्धि (Secondary Growth):

  • वास्कुलर कैम्बियम (द्वितीयक क्षार और फ्लोएम उत्पादन करता है) और कॉर्क कैम्बियम (कॉर्क बनाता है) की गतिविधि के कारण होती है।
  • पौधे के शरीर की परिधि में वृद्धि करती है।

6. ऊतक (Tissues):

  • मरिस्टमिक ऊतक: कोष विभाजन और वृद्धि के लिए जिम्मेदार।
  • एपिडर्मल ऊतक: पौधों की बाहरी सुरक्षात्मक परत बनाता है।
  • वास्कुलर ऊतक: पौधे के भीतर पानी, खनिज और पोषक तत्वों का प्रवाह करता है।
  • ग्राउंड ऊतक: समर्थन प्रदान करता है, भोजन और पानी भंडारण करता है और प्रकाश संश्लेषण करता है।

7. जड़ें (Roots):

  • प्राथमिक जड़ें: अंडे की छोटी जड़ से विकसित होती हैं।
  • द्वितीयक जड़ें: डालियों या पुरानी जड़ों से विकसित होती हैं।
  • जड़ के रेशे: छोटे, उंगली की तरह के प्रवाह जो पानी और पोषक तत्वों के अवशोषण के लिए सतह की घनत्व बढ़ाते हैं।

8. डाली (Stems):

  • हर्बेजियस डाली: हरे, गैर-लकड़ी की डाली जो गैर-लकड़ी पौधों में पाई जाती हैं।
  • वुडी डाली: भूरे, कठोर और लिंगित डाली जो पेड़ों और गेंदों में पाई जाती हैं।
  • नोड्स (Nodes): भाग जहाँ पत्तियाँ डाली से जुड़ती हैं।
  • इंटरनोड्स (Internodes): नोड्स के बीच के भाग।

9. पत्तियाँ (Leaves):

  • पत्ती का ब्लेड (Leaf blade): पत्ती का सपाट, विस्तारित भाग जहाँ प्रकाश संश्लेषण होता है।
  • पेटियोल (Petiole): डाली से पत्ती के ब्लेड को जोड़ने वाली डाली।
  • वेइन्स (Veins): पत्ती के भीतर पानी, खनिज और पोषक तत्वों का प्रवाह करते हैं।

10. फूल (Flower):

  • सेपल्स (Sepals): पत्ती की तरह की संरचनाएँ जो फूल के बगल के सबसे बाहरी परत बनाती हैं।
  • पेटल्स (Petals): रंगीन संरचनाएँ जो प्रजाति विनिर्माता को आकर्षित करती हैं।
  • स्टेमन (Stamen): पुरुष प्रजनन अंग जिसमें एंथर और फिलमेंट होते हैं।
  • पिसिल (Pistil): स्त्री प्रजनन अंग जिसमें स्टिग्मा, स्टाइल और अवरोध होते हैं।
  • फूली आरेख (Floral diagram): फूल के अंगों के व्यवस्था का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व।

11. प्रजनन (Pollination):

  • एंथर से स्टिग्मा तक पराग का प्रवाह।
  • यह आत्म-प्रजनन (एक ही फूल या पौधे में) या पारस्परिक प्रजनन (अलग-अलग फूलों या पौधों में) हो सकता है।
  • प्रजाति विनिर्माता के एजेंट: हवा, जीवाणु, पक्षी, मानव और यहाँ तक कि पानी।

12. उपगम (Fertilization):

  • पुरुष गैमेट (पराग) के संयोग स्त्री गैमेट (अंडा) के साथ।
  • फूलों के पौधों में, डबल फर्टिलाइजेशन होता है, जिससे जीवाणु और एंडोसपर्म का निर्माण होता है।

13. बीज (Seed):

  • एक अंडाशय, भोजन की भंडार (कोटीलेडन्स) और सुरक्षात्मक बीज कवच से बना होता है।
  • बीज निषेधाज्ञा (Seed dormancy): अप्रत्याशित अवस्थान को रोकने के लिए चर्बी की एक अवकाश अवधि।
  • बीज अवस्थान (Seed germination): चर्बी की गतिविधि का पुनः आरंभ, जिससे बीज अवस्थान का विकास होता है।

14. फल (Fruit):

  • फूल के परिपक्व पकने के बाद के अवरोध के साथ अन्य जुड़ी हुई संरचनाओं के साथ।
  • विभिन्न प्रकार: साधारण फल, समूह फल, बहु फल और सहायक फल।
  • महत्व: सुरक्षा, प्रसारण और फल प्रसारण के लिए जानवरों को आकर्षित करना।

15. पौधे के रासायनिक संदेश (Plant Hormones):

  • पौधों में विभिन्न शारीरिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने वाले रासायनिक संदेश।
  • ऑक्सिन्स (Auxins): कोष लम्बाई और जड़ वृद्धि को बढ़ावा देते हैं।
  • गिब्रेलिन्स (Gibberellins): डाली की लम्बाई, बीज अवस्थान और फल वृद्धि को उत्तेजित करते हैं।
  • साइटोकिनिन्स (Cytokinins): कोष विभाजन और शहतूत विकास को बढ़ावा देते हैं।
  • अब्स्किसिन अम्ल (Abscisic acid): बीज निषेधाज्ञा, अवरोध और तनाव प्रतिक्रिया में शामिल।
  • एथिलीन (Ethylene): फल पकने, पुराने होने और पर्यावरणीय तनावों के प्रतिक्रिया को नियंत्रित करता है।

16. फोटोपरिडियोमिज़्म (Photoperiodism):

  • पौधों का दिन और रात की लंबाई के प्रति प्रतिक्रिया।
  • छोटे दिन पौधे (Short day plants): फूल खिलने के लिए लंबी रात की आवश्यकता होती है (जैसे पॉइंसेट्टिया)।
  • लंबे दिन पौधे (Long-day plants): फूल खिलने के लिए लंबे दिन की आवश्यकता होती है (जैसे गुलाब)।
  • दिन-भटके पौधे (Day-neutral plants): दिन की लंबाई के बावजूद फूल खिलते हैं (जैसे मैरिगोल्ड)।

17. वर्नलाइजेशन (Vernalization):

  • कुछ पौधों के फूल खिलने के लिए ठंडी मौसम की अवधि की आवश्यकता (जैसे सर्दियों के गेहूँ)।
  • पौधों को अनुकूल मौसम के साथ अपना जीवन चक्र समन्वयित करने में सक्षम बनाता है।

18. पुराने होना और अवरोध (Senescence and Abscission):

  • पुराने होना (Senescence): पौधे के भागों के प्राकृतिक जीवन और खराबी की प्रक्रिया जिससे वे गिर जाते हैं।
  • अवरोध (Abscission): पौधे से पत्तियाँ, फूल और फल छोड़ने की प्रक्रिया।


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