पशु जगत भाग 3
संघ- ऐनेलिडा
• शरीर आकृति- शरीर मेटामेर/खंडों में विभाजित होता है (लैटिन- ऐनुलस या छोटी वलय)।
• आवास- जलीय, स्थलीय, स्वतंत्र जीवन, विरले परजीवी।
• गति अंग- शरीर की दीवार में अनुदैर्ध्य और वृत्तीय पेशियाँ होती हैं। जलीय ऐनेलिड जैसे नीरीस पार्श्व उपांग, पैरापोडिया द्वारा तैरते हैं।
• परिसंचरण तंत्र- बंद।
• उत्सर्जन तंत्र- नेफ्रिडिया ओस्मोरेगुलेशन में सहायक होते हैं।
• तंत्रिका तंत्र- युग्मित गैंग्लिया पार्श्व तंत्रिकाओं द्वारा दोहरी उरस्त तंत्रिका रज्जु से जुड़े होते हैं।
• प्रजनन- कुछ एकलिंगी (नीरीस), कुछ द्विलिंगी (केंचुआ, जोंक)।
• उदा- नीरीस, फेरेटिमा (केंचुआ), हिरुडिनारिया (रक्तचूसक जोंक)
संघ- आर्थ्रोपोडा
• सबसे बड़ा संघ (कीटों को सम्मिलित करता है)।
• खंडन- उपस्थित।
• कंकाल- बाह्य कंकाल काइटिन का होता है।
• शरीर विभाजन- सिर, वक्ष, उदर।
• गति- संधियुक्त उपांगों द्वारा।
• श्वसन- गिल्स, बुक गिल्स, बुक लंग्स, ट्रेकीय तंत्र द्वारा।
• परिसंचरण तंत्र- खुला।
• संवेदी अंग- एंटेना, यौगिक व सरल आँख, स्टैटोसिस्ट/संतुलन अंग पाए जाते हैं।
• उत्सर्जन- मालपीगी नलिकाओं द्वारा।
• प्रजनन- द्विलिंगी; निषेचन सामान्यतः आंतरिक (अंडज) सीधे या अपरोक्ष विकास के साथ।
• उदा- आर्थिक रूप से उपयोगी- एपिस (मधुमक्खी), बॉम्बिक्स (रेशमकीड़ा), लैसिफर (लाख कीट)
• वाहक- एनोफिलीज, क्यूलेक्स, एडीज (मच्छर)
• सामूहिक कीट- लोकस्टा (टिड्डी)।
• जीवित जीवाश्म- लिम्युलस (किंग क्रैब)
संघ- मॉलस्का (दूसरा सबसे बड़ा संघ)
• आवास- स्थलीय या जलीय (समुद्री/ताजे पानी)।
• शरीर विभाजन-चूना-पत्थर जैसे कवच से ढका और असंगठित होता है जिसमें स्पष्ट सिर, पेशीय पैर और आंतरिक उभार होता है।
• विशेष संरचना-नरम और स्पंजी त्वचा की परत आंतरिक उभार पर मैंटल बनाती है।
• श्वसन और उत्सर्जन-उभार और मैंटल के बीच की जगह (मैंटल गुहा) में पंख जैसी गिल्स होती हैं जो श्वसन और उत्सर्जन करती हैं।
• संवेदी अंग-अग्र भाग में संवेदी टेंटेकल्स होते हैं।
• भोजन अंग-मुंह में फाइल जैसा घिसने वाला अंग रैडुला होता है।
• प्रजनन-आमतौर पर द्विलिंगी और अंडजनुमा होता है जिसमें अप्रत्यक्ष विकास होता है।
• उदा- पिला (एपल स्नेल), पिंक्टाडा (मोती वाला ऑयस्टर), सीपिया (कटलफिश), लोलिगो (स्क्विड), ऑक्टोपस (डेविल फिश), एप्लिशिया (सी हेयर), डेंटैलियम (टस्क शेल), चेटोप्लूरा (काइटन)
फाइलम- एकिनोडर्मेटा (काँटेदार शरीर वाले)
• आवास-सभी समुद्री।
• अंतःकंकाल-चूना-पत्थरी अस्थियाँ। उल्टी उत्क्रांति दिखाते हैं (लार्वा द्विपार्श्विक होता है लेकिन वयस्क त्रिज्यिक)।
• पाचन तंत्र-पूर्ण होता है जिसमें मुंह निचले/वेंट्रल और गुदा ऊपरी/डॉर्सल भाग में होता है।
• जल वाहिकीय तंत्र-चलन, भोजन पकड़ने और ले जाने तथा श्वसन में मदद करता है।
• उत्सर्जन तंत्र-अनुपस्थित प्रजनन-द्विलिंगी।
• निषेचन-आमतौर पर बाहरी होता है जिसमें अप्रत्यक्ष विकास (मुक्त तैरने वाले लार्वा) होता है।
• उदा- एस्टेरियस (स्टारफिश), एकिनस (सी अर्चिन), एंटेडॉन (सी लिली), क्यूकुमारिया (सी खीरा) और ओफियूरा (ब्रिटल स्टार)।
फाइलम- हेमिकॉर्डेटा
• पहले कॉर्डेटा के अंतर्गत उप-फाइलम माना जाता था लेकिन अब गैर-कॉर्डेटा के अंतर्गत अलग रखा गया है।
• आवास-कृमि जैसे समुद्री जीव
• शरीर का आकार और विभाजन—शरीर बेलनाकार होता है और इसमें अग्र भाग में प्रोबॉसिस, एक कॉलर और एक लंबा धड़ होता है। प्रोबॉसिस ग्रंथि उपस्थित होती है।
• परिसंचरण तंत्र—खुला
श्वसन—गिल्स द्वारा
• उत्सर्जी अंग—प्रोबॉसिस ग्रंथि
• प्रजनन—द्विलिंगी जीव
• निषेचन—बाह्य, अप्रत्यक्ष विकास के साथ
• उदाहरण—बैलेनोग्लॉसस और सैकोग्लॉसस