पौधों की संरचनात्मक संगठन और आकारिकी 2
फूल की संरचना:
- फूल एंजियोस्पर्म (पुष्पीय पौधों) की प्रजनन संरचना होती है।
- यह सामान्यतः चार मुख्य वृत्तों या भागों से बना होता है जो संकेन्द्रित वृत्तों में व्यवस्थित होते हैं।
फूल के वृत्त:
- फूलों में चार प्राथमिक वृत्त होते हैं:
a) कैलिक्स: सबसे बाहरी वृत्त, जो सेफलों से बना होता है।
b) कोरोला: दूसरा वृत्त, जो पंखुड़ियों से बना होता है।
c) एंड्रोशियम: तीसरा वृत्त, जिसमें पुंकेसर होते हैं।
d) जाइनोशियम: सबसे भीतरी वृत्त, जिसमें कार्पेल या स्त्रीकेसर होते हैं।
प्रजनन अंग:
- फूल के प्रजनन अंग एंड्रोशियम (पुंलिंग) और जाइनोशियम (स्त्रीलिंग) होते हैं।
- एंड्रोशियम: पुंकेसर रखता है, प्रत्येक पुंकेसर में एन्थर और फिलामेंट होता है, जो पराग उत्पन्न करता है।
- जाइनोशियम: कार्पेल रखता है, प्रत्येक कार्पेल में स्टिग्मा, स्टाइल और अंडाशय होता है, जहाँ अंडाणु स्थित होते हैं।
फूल के भाग:
- सेफल: हरे, पत्तीनुमा संरचनाएँ जो कैलिक्स में होती हैं और फूल की कली की रक्षा करती हैं।
- पंखुड़ियाँ: सामान्यतः रंगीन और आकर्षक; ये कोरोला बनाती हैं और परागणकर्ताओं को आकर्षित करने का कार्य करती हैं।
- पुंकेसर: पुरुष प्रजनन अंग जिसमें एन्थर (पराग उत्पन्न करता है) और फिलामेंट होता है।
- कार्पेल/स्त्रीकेसर: स्त्री प्रजनन अंग जिसमें स्टिग्मा (ग्रहण करने वाली सतह), स्टाइल (स्टिग्मा को अंडाशय से जोड़ता है), और अंडाशय (अंडाणु रखता है) होता है।
- अंडाणु: अंडाशय के भीतर की संरचनाएँ जिनमें स्त्री युग्मज (अंडाणु) होते हैं।
प्रस्फुटन (एस्थिवेशन):
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प्रस्फुटन पुष्प कली में खुलने से पहले पंखुड़ियों या बाह्यदलों की व्यवस्था को दर्शाता है।
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सामान्य प्रस्फुटन प्रतिरूप इस प्रकार हैं:
a) द्वारीय: एक-दूसरे के ऊपर आते हैं परन्तु स्पर्श नहीं करते।
b) तिरछा (विकृत): एक हाशिया दूसरे के अन्दर आता हुआ ओवरलैप होता है।
c) छद्म-छपटीदार: आंशिक रूप से एक बाह्यदल दूसरे को ढकता हुआ ओवरलैप होता है।
d) वेक्सिलरी (पैपीलिओनेस): मटर के पुष्प में एक बड़ी बाहरी पंखुड़ी (ध्वज), दो पार्श्व पंखुड़ियाँ (पक्ष) तथा दो छोटी संलग्न पंखुड़ियाँ (कील) भीतर होती हैं।
e) पाँच-विस्तीर्ण: जब पाँच की एक वलय में बाह्यदल या पंखुड़ियाँ हों, जिनमें दो बाह्य तत्व आंशिक रूप से ओवरलैप हों और तीन आंतरिक तत्व हों।