जैव प्रौद्योगिकी और इसके अनुप्रयोग भाग 2

चिकित्सा में जैवप्रौद्योगिकीय अनुप्रयोग

1. पुनर्संयोजी चिकित्सीय पदार्थ:

  • पुनर्संयोजी डीएनए प्रौद्योगिकी सुरक्षित और प्रभावी चिकित्सीय औषधियों के बड़े पैमाने पर उत्पादन की अनुमति देती है।
  • पुनर्सयोजी चिकित्सीय पदार्थ गैर-मानव स्रोतों में देखी जाने वाली अवांछित प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं से बचते हैं।
  • 30 पुनर्संयोजी चिकित्सीय पदार्थ विश्व स्तर पर अनुमोदित हैं, 12 भारत में बाजार में उपलब्ध हैं।

2. आनुवंशिक रूप से इंजीनियर इंसुलिन:

  • पहले पशु अग्न्याशय से निकाला जाता था, जिससे एलर्जी की प्रतिक्रियाएं होती थीं।
  • पुनर्संयोजी डीएनए प्रौद्योगिकी बैक्टीरिया में मानव इंसुलिन के उत्पादन की अनुमति देती है।
  • इंसुलिन को मौखिक रूप से नहीं दिया जा सकता क्योंकि यह एक प्रोटीन है और पेट में पच जाएगा।

3. जीन चिकित्सा:

  • सामान्य जीनों को कोशिकाओं/ऊतकों में डालकर आनुवंशिक दोषों को सुधारती है।
  • पहला नैदानिक उपयोग 1990 में एडीए की कमी के लिए हुआ।
  • वर्तमान विधियों को आवधिक इन्फ्यूजन की आवश्यकता होती है; भ्रूणीय जीन सम्मिलन स्थायी इलाज दे सकता है।

4. आणविक निदान:

  • पीसीआर न्यूक्लिक अम्लों को बढ़ाता है, लक्षण दिखने से पहले बहुत कम सांद्रता में रोगजनकों का पता लगाता है।
  • एचआईवी, कैंसर उत्परिवर्तन और अन्य आनुवंशिक विकारों का पता लगाने के लिए प्रयुक्त।
  • डीएनए प्रोब हाइब्रिडाइजेशन के माध्यम से उत्परिवर्तित जीनों का पता लगाते हैं; गैर-पूरक अनुक्रम पकड़े नहीं जाते।
  • एलाइजा एंटीजन या एंटीबॉडी का पता लगाकर संक्रमणों की पहचान करता है।

ट्रांसजेनिक जानवर: लाभ और अनुप्रयोग

परिभाषा:- जानवर जिनके डीएनए में हस्तक्षेप कर उनमें एक अतिरिक्त (विदेशी) जीन डाला गया है और वह उसे व्यक्त करते हैं, उन्हें ट्रांसजेनिक जानवर कहा जाता है। ट्रांसजेनिक चूहे, खरगोश, सूअर, भेड़, गाय और मछलियाँ बनाई जा चुकी हैं, यद्यपि मौजूदा ट्रांसजेनिक जानवरों में से 95% से अधिक चूहे हैं।

I. सामान्य शरीर-क्रिया और विकास को समझना:

  • ट्रांसजेनिक जानवर जीन विनियमन और उसके शरीर-क्रियाओं तथा विकास पर प्रभाव का अध्ययन करने में सहायक होते हैं।
  • इनका उपयोग इंसुलिन-जैसे वृद्धि कारक जैसे विशिष्ट तत्वों की भूमिकाओं की जांच के लिए किया जाता है।

II. रोग अध्ययन और मॉडलिंग:

  • ट्रांसजेनिक जानवर मानव रोगों (कैंसर, सिस्टिक फाइब्रोसिस आदि) के मॉडल के रूप में कार्य करते हैं।
  • ये नए रोग उपचारों के अनुसंधान और विकास को सुगम बनाते हैं।

III. जैविक उत्पादों का उत्पादन:

  • ट्रांसजेनिक जानवर मूल्यवान जैविक उत्पाद (जैसे मानव प्रोटीन) सस्ते में बना सकते हैं।
  • उदाहरणों में एम्फीसेमा के लिए α-1-एंटीट्रिप्सिन और मानव प्रोटीन-समृद्ध दूध शामिल हैं।

IV. वैक्सीन सुरक्षा परीक्षण:

  • ट्रांसजेनिक चूहों का उपयोग वैक्सीन सुरक्षा के परीक्षण के लिए किया जाता है, जिससे प्राइमेट्स की आवश्यकता समाप्त हो सकती है।
  • इसका उदाहरण है पोलियो वैक्सीन की सुरक्षा का परीक्षण।

V. रसायन सुरक्षा परीक्षण (विषाक्तता परीक्षण):

  • ट्रांसजेनिक जानवर, जिन्हें विषों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाया गया है, का उपयोग किया जाता है।
  • यह दवाओं और अन्य रसायनों के लिए विषाक्तता परीक्षण को तेज और अधिक सटीक बनाता है।


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