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समस्या 10 : ध्रुवीय संयुक्त रासायनिक बंधों में द्रव्याकर की अवधारणा की व्याख्या करें। हाइड्रोजन फॉर्माइल (HF) और कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) आणविक अवयवों के लिए द्रव्याकर की गणना करें।
समाधान :
ध्रुवीय संयुक्त रासायनिक बंधों में असमान रूप से इलेक्ट्रॉन साझा करने पर द्रव्याकर प्रकट होता है, जिससे आंशिक सकारात्मक और आंशिक नकारात्मक छोर उत्पन्न होते हैं। इसे डिब्यू (D) इकाइयों में मापा जाता है।
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हाइड्रोजन फॉर्माइल (HF) में ध्रुवीय संयुक्त रासायनिक बंध होता है। द्रव्याकर (μ) बंध की लंबाई (d) और आवेश (Q) के गुणन के रूप में गणना किया जाता है, जहाँ Q अवयवों पर आवेशों का गुणन और अवयव आवेश (e) है: μ(HF) = d(HF) * Q(H) * Q(F) * k μ(HF) = d(HF) * (1e) * (7e) = d(HF) * 7e
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कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) में ध्रुवीय बंध होते हैं लेकिन यह रैखिक आणविक अवयव है, जिसके परिणामस्वरूप कोई कुल द्रव्याकर नहीं प्राप्त होता। दोनों C-O बंधों के द्रव्याकर एक-दूसरे को ध्रुवीय रूप से समायोजित कर देते हैं।
अतः, HF का द्रव्याकर होता है, जबकि CO₂ का कोई कुल द्रव्याकर नहीं होता।